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किशाऊ परियोजना पर बड़ा कदम, छह राज्यों के बीच होगा MoU; सुक्खू आज दिल्ली रवाना, हिमाचल के पानी के बदले मिलेगा बिजली में हिस्सा

किशाऊ परियोजना पर छह राज्यों के बीच MoU से लंबे इंतजार के खत्म होने की उम्मीद
हिमाचल के हिस्से का पानी दिल्ली-राजस्थान को, बदले में बिजली लागत में मिलेगी भागीदारी
660 मेगावाट बिजली, 1324 एमसीएम जल भंडारण और हजारों लोगों के पुनर्वास की चुनौती


हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू सोमवार दोपहर बाद दिल्ली रवाना होंगे। मुख्यमंत्री मंगलवार को नई दिल्ली में आयोजित होने वाले किशाऊ बहुउद्देशीय परियोजना के महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (MoU) हस्ताक्षर समारोह में शामिल होंगे। ऊपरी यमुना बेसिन की इस बहुप्रतीक्षित परियोजना को लेकर हिमाचल प्रदेश समेत छह राज्यों के बीच सहमति बनने के बाद अब परियोजना को आगे बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया जा रहा है।

नई दिल्ली में होने वाले इस महत्वपूर्ण समारोह की अध्यक्षता केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह करेंगे। MoU पर हिमाचल प्रदेश के अलावा उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, दिल्ली और राजस्थान के प्रतिनिधि हस्ताक्षर करेंगे। लंबे समय से पानी के बंटवारे, परियोजना की लागत और राज्यों की हिस्सेदारी को लेकर अटकी किशाऊ परियोजना के लिए छह राज्यों के बीच बनी सहमति को अहम सफलता माना जा रहा है।

जून की बैठक में सुलझा था राज्यों के बीच मुख्य विवाद

किशाऊ परियोजना को लेकर जून 2026 में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में हुई बैठक में राज्यों के बीच चल रहे मुख्य विवादों को सुलझाने पर सहमति बनी थी। इसके बाद छह राज्यों के बीच समझौते का रास्ता साफ हुआ।

तय व्यवस्था के अनुसार परियोजना के जल घटक की 90 फीसदी लागत केंद्र सरकार केंद्रीय सहायता के रूप में वहन करेगी। शेष 10 फीसदी राशि छह राज्यों के बीच साझा की जाएगी। परियोजना के वित्तीय ढांचे में यह प्रावधान राज्यों पर पड़ने वाले आर्थिक बोझ को कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

MoU पर हस्ताक्षर के बाद परियोजना को अंतिम मंजूरी के लिए केंद्रीय मंत्रिमंडल के समक्ष रखा जाना है। ऐसे में यह समझौता किशाऊ परियोजना को वर्षों से चली आ रही अड़चनों से निकालकर निर्माण की दिशा में ले जाने वाली महत्वपूर्ण कड़ी साबित हो सकता है।

हिमाचल के हिस्से का पानी दिल्ली और राजस्थान को मिलेगा

इस समझौते में हिमाचल प्रदेश के लिए सबसे महत्वपूर्ण प्रावधान उसके जल हिस्से से जुड़ा है। व्यवस्था के तहत हिमाचल के हिस्से के पानी को दिल्ली और राजस्थान को उपलब्ध कराया जाएगा।

इसके बदले दिल्ली और राजस्थान हिमाचल के हिस्से के बिजली घटक की लागत में योगदान करेंगे। यानी हिमाचल अपने आवंटित पानी का उपयोग दिल्ली और राजस्थान के लिए होने देने के बदले परियोजना के बिजली हिस्से में आर्थिक भागीदारी का लाभ प्राप्त करेगा।

यह व्यवस्था हिमाचल के लिए इसलिए अहम है क्योंकि परियोजना का सीधा प्रभाव राज्य के जल संसाधनों और बड़े भू-भाग पर पड़ेगा। वहीं बिजली से जुड़े आर्थिक लाभ और लागत में अन्य राज्यों की भागीदारी को राज्य के हित में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

660 मेगावाट बिजली पैदा करेगी किशाऊ परियोजना

किशाऊ बहुउद्देशीय परियोजना टौंस नदी पर प्रस्तावित है। टौंस यमुना की प्रमुख सहायक नदियों में शामिल है। परियोजना स्थल हिमाचल प्रदेश के सिरमौर और उत्तराखंड के देहरादून क्षेत्र की सीमा पर स्थित है।

परियोजना की स्थापित बिजली उत्पादन क्षमता 660 मेगावाट होगी। इसके लिए 165 मेगावाट की चार इकाइयां प्रस्तावित हैं। परियोजना से सालाना करीब 1379 मिलियन यूनिट बिजली उत्पादन का अनुमान है।

इसके साथ ही बांध के निर्माण से करीब 1324 मिलियन क्यूबिक मीटर लाइव जल भंडारण क्षमता विकसित होगी। यह जल भंडारण ऊपरी यमुना बेसिन में पानी की उपलब्धता और विभिन्न राज्यों की जरूरतों को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

करीब 97 हजार हेक्टेयर क्षेत्र को मिलेगा सिंचाई का लाभ

किशाऊ परियोजना को केवल जलविद्युत परियोजना के तौर पर नहीं देखा जा रहा है। इसका उद्देश्य बड़े क्षेत्र में सिंचाई, पेयजल और औद्योगिक जरूरतों के लिए पानी उपलब्ध कराना भी है।

परियोजना से करीब 97,076 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा विकसित होने की योजना है। इसके अलावा पेयजल और औद्योगिक उपयोग के लिए भी पानी उपलब्ध कराया जाएगा। इससे ऊपरी यमुना बेसिन से जुड़े राज्यों में जल उपलब्धता को बेहतर बनाने की उम्मीद है।

परियोजना के तहत करीब 236 मीटर ऊंचे कंक्रीट ग्रेविटी बांध का निर्माण प्रस्तावित है। इतना ऊंचा बांध बड़ी मात्रा में पानी का भंडारण करने में सक्षम होगा और परियोजना की जल तथा बिजली उत्पादन क्षमता को आधार देगा।

हिमाचल और उत्तराखंड में डूबेगा हजारों हेक्टेयर क्षेत्र

किशाऊ परियोजना के बड़े लाभों के साथ इसका सामाजिक और पर्यावरणीय प्रभाव भी महत्वपूर्ण है। परियोजना के कारण हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड का बड़ा क्षेत्र जलमग्न होने की स्थिति में आएगा।

उपलब्ध परियोजना विवरण के अनुसार हिमाचल प्रदेश में करीब 1,498 हेक्टेयर और उत्तराखंड में करीब 1,452 हेक्टेयर क्षेत्र पानी में डूब जाएगा। दोनों राज्यों में कुल 17 गांव प्रभावित होने का अनुमान है।

परियोजना दस्तावेजों के अनुसार करीब 5,500 लोगों के पुनर्वास की आवश्यकता पड़ सकती है। अकेले हिमाचल प्रदेश में आठ गांव प्रभावित होंगे और करीब 2,092 लोगों के प्रभावित होने का अनुमान है।

ऐसे में परियोजना के आगे बढ़ने के साथ पुनर्वास, प्रभावित परिवारों के अधिकार और स्थानीय लोगों के हितों से जुड़े मुद्दे भी महत्वपूर्ण रहेंगे। परियोजना के निर्माण की गति के साथ इन प्रभावित क्षेत्रों के लोगों के पुनर्वास की प्रक्रिया भी बड़ी चुनौती होगी।

हिमाचल और उत्तराखंड पहले ही बना चुके हैं संयुक्त उपक्रम

किशाऊ परियोजना को लेकर हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड पहले ही संयुक्त उपक्रम का गठन कर चुके हैं। इसके लिए किशाऊ कॉरपोरेशन लिमिटेड का गठन जनवरी 2017 में किया गया था।

इसके बावजूद छह राज्यों के बीच जल बंटवारे, लागत वहन और परियोजना से जुड़े अन्य मुद्दों पर सहमति न बन पाने के कारण परियोजना आगे नहीं बढ़ सकी। अब छह राज्यों के बीच MoU होने से इस संयुक्त प्रयास को व्यापक अंतरराज्यीय सहमति का आधार मिलने की उम्मीद है।

17 साल से इंतजार, अब अंतिम मंजूरी की ओर बढ़ेगी परियोजना

किशाऊ परियोजना को वर्ष 2008 में राष्ट्रीय परियोजना घोषित किया गया था। इसके बावजूद करीब 17 वर्षों तक यह परियोजना विभिन्न स्तरों पर अटकी रही। पानी के बंटवारे, लागत की जिम्मेदारी और राज्यों के बीच सहमति जैसे मुद्दे इसकी राह में सबसे बड़ी बाधाओं में रहे।

जून 2026 में केंद्र सरकार की पहल पर छह राज्यों के बीच सहमति बनने के बाद अब MoU का रास्ता साफ हुआ है। मंगलवार को होने वाला समझौता परियोजना के लिए एक महत्वपूर्ण पड़ाव होगा।

MoU पर हस्ताक्षर के बाद इसे अंतिम मंजूरी के लिए केंद्रीय मंत्रिमंडल के सामने रखा जाएगा। इसके बाद परियोजना के निर्माण से जुड़ी प्रक्रिया को आगे बढ़ाने का रास्ता खुल सकता है।

यमुना में स्वच्छ पानी का प्रवाह बढ़ाने का भी लक्ष्य

किशाऊ परियोजना का उद्देश्य केवल 660 मेगावाट बिजली उत्पादन तक सीमित नहीं है। परियोजना के जरिए ऊपरी यमुना बेसिन में पानी का भंडारण बढ़ाने, सिंचाई और पेयजल की जरूरत पूरी करने के साथ यमुना में स्वच्छ पानी का प्रवाह बढ़ाने की भी योजना है।

केंद्र के अनुसार परियोजना से यमुना के पुनर्जीवन की दिशा में भी मदद मिलेगी। पर्याप्त जल भंडारण होने से विभिन्न मौसमों में पानी की उपलब्धता को बेहतर तरीके से प्रबंधित किया जा सकेगा।

दिल्ली समेत ऊपरी यमुना बेसिन से जुड़े राज्यों के लिए यह परियोजना भविष्य की जल जरूरतों के लिहाज से भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। दूसरी ओर बिजली उत्पादन से ऊर्जा क्षेत्र को अतिरिक्त क्षमता मिलने की उम्मीद है।

हिमाचल के लिए पानी और बिजली दोनों का सवाल

किशाऊ परियोजना हिमाचल प्रदेश के लिए आर्थिक और ऊर्जा दोनों लिहाज से महत्वपूर्ण है। एक ओर परियोजना के कारण राज्य का बड़ा क्षेत्र प्रभावित होगा और हजारों लोगों के पुनर्वास की चुनौती सामने आएगी, वहीं दूसरी ओर राज्य को परियोजना के बिजली घटक में आर्थिक लाभ मिलेगा।

हिमाचल के हिस्से के पानी को दिल्ली और राजस्थान को उपलब्ध कराने के बदले दोनों राज्यों की ओर से बिजली घटक की लागत में योगदान की व्यवस्था की गई है। साथ ही जल घटक की 90 फीसदी लागत केंद्र सरकार द्वारा वहन किए जाने का प्रावधान भी परियोजना के वित्तीय ढांचे में अहम है।

अब सभी की नजरें मंगलवार को होने वाले MoU हस्ताक्षर समारोह पर हैं। छह राज्यों के बीच औपचारिक समझौते के बाद यदि केंद्रीय मंत्रिमंडल से अंतिम मंजूरी मिलती है तो वर्षों से अटकी किशाऊ परियोजना के धरातल पर उतरने की प्रक्रिया तेज हो सकती है। इसके साथ ही हिमाचल के लिए परियोजना से मिलने वाले लाभ और प्रभावित होने वाले परिवारों के पुनर्वास—दोनों पहलुओं पर आने वाले समय में खास नजर रहेगी।